*हम लड़का लड़की में भेद नहीं करते*
व्हाट्सप्प
*जो लोग कहते हैं कि हम लड़का लड़की में भेद नहीं करते और हमने अपनी लड़की को लड़कों की तरह पाला है, ऐसे लोग समाज के सबसे बड़े द्रोही होते हैं।*
*समाज में जितनी विद्रुपतायें फैली हैं और परिवार का जितना विखंडन हुआ है, सब इन्हीं लोगों की देन है।*
*लड़का लड़की का भेद तो स्वयं प्रकृति बनाकर भेजती है।*
*आपके मानने या न मानने से या लड़का लड़की में भेद न करने से या लड़की को लड़कों की तरह पालने से न तो आपकी लड़की वीर्य (Sperms) का उत्पादन कर सकती है और न ही आपके लड़के को Periods या माहवारी आएगी।*
*प्रकृति अपने अनुरूप चलेगी। आप क्या मानते हैं और क्या नहीं, यह प्रकृति नहीं देखेगी।*
*जो लोग यह कहते हैं कि हमने अपनी लड़की को लड़के की तरह रखते हैं , ऐसे लोग सबसे बड़े नारी और स्त्री द्रोही होते हैं।*
*मतलब तुमने स्त्रियोचित गुण और लक्षण को निम्न माना है तभी तुम उसे लड़कों के गुण प्रदान कर रहे हो। अर्थात तुम्हारी दृष्टि में स्त्रियों की कोई औकात नहीं, लड़कों के गुण तुम्हारे लिए सर्वोपरि है??*
*ये लोग इतने नीच होते हैं कि स्त्रियों में यही हीन भावना भरते हैं और स्त्रीत्व के लक्षणों से एक स्त्री को विहीन करते हैं। इन्होंने ही समाज में स्त्रियों के प्रति घृणा भरा है।*
*आप हमेशा पायेंगे कि जिनके माता पिता यह कहते हैं कि हमने लड़कियों को लड़के की तरह पाला है, उन्हीं के घर बर्बाद होते हैं, उन्हीं की लड़कियों का गृहस्थ जीवन नरक बन जाता है या सम्बंध विच्छेद के मामले उन्हीं के यहाँ सबसे ज्यादा पाए जाते हैं। यह अपने घर के साथ साथ दूसरों के घर को भी बर्बाद करते हैं।*
*स्त्रियों का स्वयं अपना एक अलग लक्षण और गुण होता है जो समाज को क्रियान्वन करने के लिए अत्यंत आवश्यक है। शील, धैर्य, लज्जा, क्षमा, सहिष्णुता, शुचिता, ममता, सेवाभावना, मधुरभाषिणी, इत्यादि ही स्त्रियों के वंदनीय गुण होते हैं जिससे वह एक राक्षस को भी देव बना देती हैं।*
*ऐसे ही जो लड़कों के गुण हैं वह लड़कों में अवश्य होने चाहिए, वरना वह गीदड़ और पुरुषार्थ से विहीन हो जाएंगे।*
*जिस स्त्री में स्त्रियोचित गुण नहीं होंगे , वह किसी भी पुरुष को प्रसन्न नहीं रख पाएगी और अंततः सम्बंध विच्छेद ही एकमात्र मार्ग बचता है।*
*जिस पुरुष में पुरुषोचित गुण नहीं होंगे, वह किसी भी स्त्री को प्रसन्न नहीं रख पायेगा और अंततः सम्बंध विच्छेद।*
*पुरुषों को कभी भी पुरुषोचित गुणों वाली स्त्रियाँ नहीं पसंद आयेगी।*
*स्त्रियों को कभी भी स्त्रियोचित गुणों वाले पुरुष नहीं पसंद आयेंगे।*
*पृथ्वी और आकाश दोनों की अलग महत्ता और गरिमा है।*
*न ही पृथ्वी आकाश का स्थान ले सकती है और न ही आकाश पृथ्वी का।*
*यह chemistry की तरह है + Charge और - Charge*
*दोनों एक दूसरे से तभी सम्बंध बनायेंगे जब + और - होंगे।*
*ज्यों ही + में - के गुण आने लगेंगे दोनों एक दूसरे को repel करने लगेंगे।*
*और यही होता है। लड़कों की तरह पाली जाने वाली लड़कियाँ न पूर्ण रूप से स्त्री हो पाती हैं न ही पुरुष और ऐसे ही लड़कियों के समान पाले जाने वाले लड़के।*
*दोनों नपुंसकत्व को प्राप्त होते हैं जिससे सामाजिक विखंडन के अलावा कुछ प्राप्त नहीं होता।*
*इसलिए सभी लोग यह मूर्खतापूर्ण और समाज द्रोही आचरण छोड़ दें और पुरुषों में पुरुषोचित गुण और स्त्रियों में स्त्रियोचित गुणों का विकास करें और होने दें अन्यथा आने वाले समय में यह समाज पूरी तरह अशांत और किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाएगा।*
*समाज की संरचना एवं आधारभूत ढाँचा नष्ट हो जाएगा।*
*अब भी समय है, बचा लो नष्ट होने से।*
*बहुत सारे लोगों को तो मेरी बात हजम भी नहीं होगी।।*
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