सेक्स बनाम चरमसुख
सेक्स बनाम चरमसुख!
,,, सेक्स बिना चरमसुख प्राप्त किए या
चरमसुख की अनुभूति प्राप्त किए बेमानी है!
,, पुरुष के केस में उसे चरमसुख प्राप्त जब
होता है जब वह सीमेन डिस्चार्ज करता है।
माना ये ओर्गास्म सिर्फ और सिर्फ छह सेकेंड
के लिए होता है लेकिन सबसे ज्यादा सुख चैन
सुकून और आनंद देता। पुरुष के प्राइवेट पार्ट
में चार हजार नसें होती हैं!
,,, स्त्री के केस सीमेन जैसा कोई पदार्थ नहीं
निकलता वरन उसकी योनि पानी की तरह
पदार्थ छोड़ती है जो गीलापन और उत्तेजना
बढ़ाने के लिए काम आता है। स्त्री में क्लोरटिस
जो दो इंच पर शिश्न जैसा उभरा रहता है सबसे
संवेदनशील होता है और यही पानी छोड़ती है
जिससे चरमसुख की अनुभूति प्राप्त होती है।
स्त्री योनि में आठ हजार नसें होती है। इसके
योनि के अंदर जो संवेदनशील अंग नहीं होता
वो भी घर्षण के वक्त संकुचन और फैलाव की
एक्टिविटी से पानी छोड़ती रहती है कुछ स्त्रियों
में दो बार, कुछ में चार बार और कुछ में आठ
बार ये क्रिया होती रहती है। स्त्री में आर्गैज़्म
तेईस सेकेंड तक रहता है।
,, अमूमन देखा गया है पुरुष जल्दी डिस्चार्ज होकर
चरमसुख प्राप्त कर लेते हैं और स्त्रियां इससे बंचित
रह जाती हैं तब वे मैस्टरबेशन क्रिया करके पानी
निकाल कर संतुष्टि प्राप्त कर लेती हैं।
,,,, पुरुष को फीमेल पार्टनर का ख्याल रखना चाहिए
और धीमी गति से सेक्स कर स्त्री को संतुष्टि करना चाहिए।
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