सेक्स से डरो नहीं, इसे समझो, सीखो, जीओ ये जीवन का हिस्सा है। अस्तित्व का आरम्भ है, आनन्द का महासागर है।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है सेक्सटॉय का बाजार।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है पशुओं से सेक्स का प्रयोग।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है पुरुष का पुरुष से
सेक्स का रिवाज।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है औरत का औरत से
सेक्स का रिवाज।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है पुरूष वैश्याओं का बाजार।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है गुदा मैथुन का रिवाज।
बहुत तेजी से बढ़ रहा है अनेक लोगों से
सेक्सुअल रिलेशन बनाने का फैशन।
योनि सेंसिटिविटी खो कर वज़्र बन रही और लिंग मुर्दा।_
क्या बिना गहरे मिलन के,
बिना गहरे सम्भोग के,
बिना दिव्यतम तृप्ति के आनन्द का,
सुखद सृष्टि का अस्तित्व सम्भव है ?
_राम, कृष्ण, महावीर, बुद्ध, कबीर, नानक,
मोहम्मद कैसे पैदा हुए ?
कैसी सन्तानें आयेंगी धरती पर ?_
इनके माँ बाप का मिलन,
केवल वासना मात्र या अधूरा नहीं था !
वो था एक अद्भुत प्रेम मिलन !
अलौकिक ऑरगाज्म देने वाला सङ्गम !!
आज के बच्चे बिना प्रेम के पैदा हो रहे हैं,
हर पुरूष स्त्री एक दूसरे को
सेक्स की मशीन समझ रहे हैं !
जब तक दोनों में प्रेम पैदा नहीं होगा,
तब तक सिर्फ शारीरिक मिलन ही सम्भव है।
नैसर्गिक (नेचुरल) और
ऑर्गैस्मिक (तृप्तिपूर्ण) सम्भोग से वञ्चित स्त्री
मन से और फिर तन से भी रोगी बन जाती है।
सेक्स से बचने-बिदकने लगती है।
बाहर से कितनी भी बेहतर दिखे -
भीतर से सड़ती है।
प्राइवेट पार्ट तक मुर्दा,
सम्वेदना शून्य हो जाता है।
_स्वस्थ सम्भोग तो इतना आनन्द देता है कि
स्त्री बेसुध हो कर अलग ही लोक में पहुँच जाती है।
जहाँ प्रेम नहीं, जहाँ गहनतम समागम नहीं :
वहाँ कैसे उम्मीद कर सकते हैं कि
फिर से राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक,
मोहम्मद जैसे लोग पैदा होंगे !
उलटा इससे बुद्धू, विकारग्रस्त जरूर पैदा होंगे !
और हो ही रहे हैं।
बच्चे मानसिक रूप से बीमार, दुराचार वृत्ति वाले,
नपुन्सक, अपङ्ग, पागल पैदा हो रहे है।
अगर अभी भी
सेक्स पे ध्यान नहीं दिया गया तो
21 वीं सदी के अन्त तक दुनिया में
40% से ज्यादा आबादी समलैंगिक हो जायेगी।
किन्नर पैदा होंगे,
और लोगों का सेक्स भी प्राकृतिक नहीं रहेगा,
60% आबादी आज
सेक्स से सम्बन्धित बीमारियों से पीड़ित है।
ऐसा क्यों हो रहा है ?
सेक्स को समझने की
कोशिश नहीं करने के कारण ही
आज मानव जाति में इतना तनाव, हिंसा,
आतंकवाद हो रहा है।
यहाँ तक कि
90% पागल होने वाले लोगों का कारण
सेक्स ही है।
_अजीब प्रकार के मनुष्य हो गये हैं,
इन सबका एक मात्र कारण है, सेक्स ;
और अब तो सेक्स भी सेक्स नहीं रहा !
वो भी नकली हो गया है,
शारीरिक सेक्स कम होता जा रहा है,
मानसिक सेक्स ज्यादा हो रहा है,
मन में सेक्स चल रहा है।_
लेकिन -
तन सेक्स के योग्य नहीं रहा,
ऐसा क्यों हो रहा है ?
कभी सोचा आपने ?
_लोग पोर्न देख रहे हैं,
सेक्स की कहानियाँ पढ़ रहे हैं,
हस्तमैथुन कर रहे हैं,
आज 95% आबादी हस्तमैथुन करती है।
आज 80 साल के बूढ़े
20 साल की लड़की से शादी कर रहे हैं।
आये दिन आप पढ़ते ही होंगे
लोग जानवरों से भी सेक्स कर रहे हैं,
मनुष्य के सिवा कोई भी
दूसरी प्रजाती ऐसा नहीं कर रही है,
बकरी को देख कर भैंसे के मन में
सेक्स का ख्याल नहीं आता,
लेकिन इन्सान तो ये भी कर रहे हैं।_
यूरोपीय देशो में तो लोग
जानवरों से शादी तक कर रहे हैं।
शादीशुदा लोग हस्तमैथुन कर रहे हैं।
ये सब सेक्स को गन्दा समझने, मानने और
दबाने के कारण हो रहा है।
जबकि इसके बिना जीवन सम्भव नहीं है।
लेकिन कोई इसे समझने, जानने और
मानने को राजी नहीं हैं।
_सेक्स से डरो नहीं,
इसे समझो, सीखो, जीओ !
ये जीवन का हिस्सा है।
अस्तित्व का आरम्भ है,
आनन्द का महासागर है।
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