स्त्री की बड़ी और भरी हुई छाती पुरुष को क्यों आकर्षित करती है ?
स्त्री की बड़ी और भरी हुई छाती पुरुष को क्यों आकर्षित करती है ?
मनुष्य के जीवन का सबसे पहला अनुभव माँ से जुड़ा होता है। जन्म लेते ही शिशु माँ की गोद में आता है, माँ की छाती से पोषण पाता है, और उसी स्पर्श में उसे सुरक्षा, प्रेम और अस्तित्व का पहला बोध मिलता है।
यही कारण है कि जीवन भर मनुष्य के भीतर एक गहरी खोज चलती रहती है—प्रेम की, अपनत्व की, और उस मूल स्रोत की, जहाँ से उसने पहली बार संतुष्टि का अनुभव किया था।
ओशो कहते हैं कि हर मनुष्य के भीतर एक “मूल स्मृति” (basic imprint) होती है। माँ के साथ जो पहला संबंध बना, वही उसकी चेतना में गहराई से अंकित हो गया। बाद में जब वह स्त्री की ओर आकर्षित होता है, तो केवल शरीर की ओर नहीं, बल्कि उस अनुभव की पुनः तलाश में होता है—जहाँ उसे पूर्ण स्वीकृति और प्रेम मिला था।
लेकिन समस्या यह है कि यह खोज अचेतन (unconscious) रूप में होती है। व्यक्ति समझ नहीं पाता कि वह वास्तव में क्या खोज रहा है। इसलिए वह बार-बार बाहर भटकता है, इच्छाओं के पीछे दौड़ता है, लेकिन तृप्ति नहीं मिलती।
ओशो का संदेश स्पष्ट है—
जब तक मनुष्य “होश” में नहीं आता, तब तक उसकी इच्छाएँ उसे भटकाती रहेंगी।
ध्यान ही वह मार्ग है, जो इस अचेतन खोज को चेतना में बदल देता है।
जब ध्यान गहराता है, तब व्यक्ति समझता है कि जिस प्रेम की वह बाहर तलाश कर रहा था, वह उसके भीतर ही मौजूद है। तब उसका संबंध स्त्री से भी बदल जाता है—वह अब केवल शारीरिक आकर्षण नहीं रह जाता, बल्कि एक जागरूक, सम्मानपूर्ण और प्रेमपूर्ण संबंध बन जाता है।
ध्यान के माध्यम से जब होश आता है, तब मनुष्य अपनी इच्छाओं का गुलाम नहीं, बल्कि उनका साक्षी बन जाता है।
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