कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटकर भी किसी को अपनी टूटन का एहसास नहीं होने देते
कुछ लोग जब दुखी होते हैं, तो अपनी तकलीफ़ बता देते हैं। लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो टूटकर भी किसी को अपनी टूटन का एहसास नहीं होने देते।
वो शिकायत नहीं करते, हिसाब नहीं मांगते और न ही सामने वाले को उसकी गलती का एहसास कराने की कोशिश करते हैं। बस धीरे-धीरे अपने भीतर से उस रिश्ते को समेटने लगते हैं, जिसे उन्होंने कभी पूरे मन से जिया था।
उनकी सबसे बड़ी खूबी यही होती है कि चोट खाने के बाद भी उनके भीतर की अच्छाई खत्म नहीं होती। वो वही नरमी रखते हैं, वही अपनापन रखते हैं और दूसरों के दर्द को समझते रहते हैं। फर्क बस इतना आता है कि अब वो अपना दर्द हर किसी के सामने रखना बंद कर देते हैं।
एक दिन आपको लगेगा कि सब पहले जैसा ही है। वो बात करेंगे, मुस्कुराएंगे, आपकी मदद भी करेंगे। लेकिन उनके भीतर कहीं एक दरवाज़ा बंद हो चुका होगा। ऐसा दरवाज़ा जिसे उन्होंने गुस्से में नहीं, बार-बार निराश होने के बाद बंद किया होगा।
किसी अच्छे इंसान को खोना अक्सर किसी रिश्ते के खत्म होने जैसा नहीं दिखता। वो बिना किसी आखिरी लड़ाई के दूर हो जाता है। उसकी आवाज़ में नाराज़गी नहीं होती, बस पहले जैसी गर्माहट नहीं रहती। उसकी मौजूदगी होती है, लेकिन उसमें पहले जैसा अपनापन नहीं होता।
और शायद सबसे गहरी बात यही है कि सच्चे दिल वाले लोग हमेशा आपको छोड़ना नहीं चाहते। वो बहुत देर तक रिश्ते को बचाने की कोशिश करते हैं। आपकी गलतियों को समझते हैं, आपकी मजबूरियों को जगह देते हैं और कई बार अपने हिस्से का दर्द भी खुद उठा लेते हैं।
लेकिन हर दिल की भी एक सीमा होती है।
जिस दिन उन्हें महसूस हो जाता है कि उनके होने और न होने से अब कोई फर्क नहीं पड़ता, उसी दिन वो भीतर से विदा लेना शुरू कर देते हैं। फिर उनका जाना अचानक नहीं होता। वो तो बहुत पहले अपने मन में दूर हो चुके होते हैं, बस आपको पता देर से चलता है।
इसलिए किसी ऐसे इंसान को बार-बार मत आज़माइए, जो आपको पूरे दिल से अपना मानता है। क्योंकि भरोसा कांच की तरह टूटकर हमेशा आवाज़ नहीं करता। कभी-कभी वह बस इतना करता है कि इंसान आपके सामने खड़ा रहता है, लेकिन अपना दिल आपसे वापस ले लेता है।
और जब कोई सच्चा दिल अपना दरवाज़ा बंद कर लेता है, तो उसे खोलने के लिए पछतावा भी कई बार बहुत देर से आता है।
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