रात को बुरा खोलकर सोने का सुख
रात को बुरा खोलकर सोने का सुख दिनभर वो इलास्टिक पीठ पर ऐसे चिपका रहता है जैसे कोई सरकारी टैक्स! रात को जब वो हटता है, तो लगता है कि सीधे टैक्स-फ्री ज़ोन में एंट्री हो गई है। 😄
कंधों पर जो वो पट्टियां (straps) दिनभर वजन संभाले रहती हैं, रात को उन्हें हटाकर कंधे ऐसे रिलैक्स होते हैं जैसे उनका शनिवार-रविवार (वीकेंड) शुरू हो गया हो। 🛋️
जिन महिलाओं की बुरा में अंडरवायर (wire) होता है, उनके लिए तो रात का सुख और भी दिव्य है। दिनभर वो वायर ऐसे चुभता है जैसे कोई पीठ पीछे चुगली कर रहा हो। रात को उसे
निकालते ही लगता है कि जिंदगी से सारे कांटे निकल गए!
ढीले-ढाले टी-शर्ट या गाउन में जब बेड पर जाओ, तो ऐसा लगता है जैसे हम हवा में तैर रहे हैं। गद्दे पर लेटते ही शरीर कहता है—बस, अब सुबह अलार्म बजने तक मुझे कोई डिस्टर्ब मत करना
रात में बिना कपड़ो के सोना भारी-भरकम कपड़ों का झंझट खत्म होते ही शरीर का अपना कूलिंग सिस्टम ऑन हो जाता है। हवा सीधे स्किन से डायरेक्ट डील करती है।
दिनभर टाइट जींस, फॉर्मल कपड़े और बेल्ट और इलास्टिक के अत्याचार को सहने के बाद, रात में जब इंसान ढीले-ढाले पजामे और ढीली टी-शर्ट (या बिना कपड़ों के कंबल के अंदर) सोता है ना कसम से वो सुख किसी जन्नत से कम नहीं होता। ऐसा लगता है मानो शरीर को दिनभर के बंधनों से परमानेंट आज़ादी मिल गई हो। रोम-रोम गाता है आज़ादी मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है।
बिना कपड़ों के सोने का एक रिस्क यह भी है कि मच्छरों को बफ़े डिनर मिल जाता है। उन्हें खून पीने के लिए कपड़ों की लेयर पार नहीं करनी पड़ती। सीधे फ्री एंट्री मिलती है।
अगर रात में घर में चोर घुस आए, तो नॉर्मल इंसान लाठी ढूंढता है। लेकिन आजाद मोड में सोने वाला इंसान सबसे पहले अपनी पैंट ढूंढता है। चोर बाद में पकड़ा जाएगा, इज्जत पहले बचनी चाहिए।
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